अपकृत्य विधि मोटर वाहन अधिनियम एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986

परिवादी कौन होता है ? किन किन केस में उपभोक्ता को परिवादी माना गया है ? 
What Is Complainant 

परिभाषा -  उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 2 ( 1 ) ( ख )  में परिवादी की परिभाषा दी गई है 

परिवादी से अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से है जो उपभोक्ता मंच अथवा आयोग में परिवाद ला सकता है

परिवादी के अंतर्गत किस किस को परिवादी माना गया है

  1. उपभोक्ता

  1. कंपनी अधिनियम के अंतर्गत रजिस्ट्रीकरत का कोई स्वैच्छिक उपभोक्ता संगम

  1. केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार

  1. समान हित रखने वाले उपभोक्ता

  1. उपभोक्ता की मृत्यु हो जाने पर उसका वेद प्रतिनिधि

कीमत देकर बीज खरीदने वाला कृषक परिवादी है वह उपभोक्ता मंच में परिवार ला सकता है
( मैं नेशनल सीड्स कारपोरेशन लिमिटेड बनाम एम मधुसूदन रेडी ए आई आर 2012 एस सी 1160 )

सुरेंद्र कुमार अग्रवाल बनाम दिल्ली को फाइनेंस लिमिटेड ए आई आर 2007 डी. ओ. सी. 35 मध्य प्रदेश के मामले में परिवादी ने अपनी आजीविका के लिए विपक्षी से क्रय विक्रय करार के अधीन धन प्राप्त करें ट्रक खरीदी कालांतर में दोनों में विवाद उत्पन्न हो गया परिवादी को इस मामले में उपभोक्ता माना गया !

【 कानून से जुड़ी जानकारी के लिए कृपया Ashok Jangir LL.B Channel को सब्सक्राइब करे 】

उपभोक्ता संरक्षण संशोधन अधिनियम 2002 उपभोक्ता की मृत्यु की दशा में उसके विधिक प्रतिनिधि का उत्तराधिकारी द्वारा परिवाद प्रस्तुत किए जाने की व्यवस्था इस संशोधन अधिनियम द्वारा की गई है


इससे पूर्व गुलाम अब्दुल हुसैन बना डॉक्टर कट्टा 1991 के मामले में परिवाद के विचाराधीन रहते परिवादी की मृत्यु हो जाने पर परिवादी के वारिसों को अभिलेख पर लिया गया था

डॉ एस गुरु नाथन बनाम विजय हेल्थ सेंटर 2002 इस मामले में परिवादी ने अभी वचनों से बाहर नहीं जा सकता अर्थात वह परिवाद में अंकित तथ्यों से आबर्द होता है कि इस मामले में कहां गया था

वेबसाइट - www.ashokjangirllb.com

Youtube Subscribe - Ashok Jangir LL.B 

Facebook Page - Ashok Jangir LL.B 

Instagram - Ashok Jangir LL.B

Telegram - Ashok Jangir LL.B ( Search Telegram )